साँझ

अक्तूबर 05, 2020 2

साँझ  नभ के मग पर पग - पग रखकर शांत रूप कुछ अरुणिम होकर घन-सघन को रक्तिम कर कर दूर क्षितिज पर पहुंचा दिनकर  देख क्षितिज पर रथ दिनकर का  मन उ...

मेरा मन (MERA MANN)

अगस्त 02, 2020 10

बाहर बरसता घन सघन, अन्दर सुलगता मेरा मन। बारिश की हर इक बूंद को, खुद में समाता मेरा मन।। बाहर बरसता............. कुछ मन उदास प...

अर्थहीन (ARTHHEEN)

जुलाई 25, 2020 2

अर्थहीन शाश्वत समझकर देह को न देही का कुछ भान है। बस भौतिकी का ज्ञान है, बस भौतिकी का ज्ञान है।। जीवन हुआ है अर्थहीन, ...

सीख (SEEKH)

जुलाई 11, 2020 2

1 बागबां ने बरसों पहले उम्मीद का एक पौधा रोपा था सोचा था गुलों से महकेगा गुलशन दरख़्त बनते ही पनाहगार बना उल्लू का फिर वह...

बच्चे (Children)

जून 17, 2020 12

photo source- google बच्चे अभी आकाश सूना था, अभी नभ नीले रंग में था। अभी स्कूल में थे बच्चे और, मैं अपनी छत पे बैठा था। ...

बादल

जून 08, 2020 2

बादल PHOTO SOURCE: GOOGLE बादल हूं मैं या बादल की तरह बिखरा हुआ हूं, धरा से दूर हूं पर............. न नभ तक पहुंचा हुआ हूं.........

Blogger द्वारा संचालित.