जगुल्या

सितंबर 01, 2021 47

Photo: social media जगुल्या पहाड़ों की तलहटी में खोली गाँव था. सब प्रकार  का पहाड़ी अनाज यहाँ होता था. गाँव समृद्ध भी नहीं था परन्तु अपनी आवश्...

नज़र और चश्में

जून 04, 2021 4

चश्मा बेच रहा था वह। अलग-अलग नज़र के चश्में थे उसके पास नज़र अपनी भी खराब थी पर खराबी भी समझ नही आ रही थी। बड़े-बड़े लोगों को देखा है बुद्धिजीवि...

हिन्दी काव्यशास्त्रीय रसों के परिप्रेक्ष्य में गढ़वाली लोकगीत

मई 08, 2021 0

बुरांस राज्य वृक्ष  हिन्दी काव्यशास्त्रीय रसों के परिप्रेक्ष्य में गढ़वाली लोकगीत                   भारत विविधताओं का देश है। यहां भौगोलिक, स...

साँझ

अक्तूबर 05, 2020 4

साँझ  नभ के मग पर पग - पग रखकर शांत रूप कुछ अरुणिम होकर घन-सघन को रक्तिम कर कर दूर क्षितिज पर पहुंचा दिनकर  देख क्षितिज पर रथ दिनकर का  मन उ...

मेरा मन (MERA MANN)

अगस्त 02, 2020 10

बाहर बरसता घन सघन, अन्दर सुलगता मेरा मन। बारिश की हर इक बूंद को, खुद में समाता मेरा मन।। बाहर बरसता............. कुछ मन उदास प...

अर्थहीन (ARTHHEEN)

जुलाई 25, 2020 2

अर्थहीन शाश्वत समझकर देह को न देही का कुछ भान है। बस भौतिकी का ज्ञान है, बस भौतिकी का ज्ञान है।। जीवन हुआ है अर्थहीन, ...

सीख (SEEKH)

जुलाई 11, 2020 2

1 बागबां ने बरसों पहले उम्मीद का एक पौधा रोपा था सोचा था गुलों से महकेगा गुलशन दरख़्त बनते ही पनाहगार बना उल्लू का फिर वह...

बच्चे (Children)

जून 17, 2020 12

photo source- google बच्चे अभी आकाश सूना था, अभी नभ नीले रंग में था। अभी स्कूल में थे बच्चे और, मैं अपनी छत पे बैठा था। ...

बादल

जून 08, 2020 2

बादल PHOTO SOURCE: GOOGLE बादल हूं मैं या बादल की तरह बिखरा हुआ हूं, धरा से दूर हूं पर............. न नभ तक पहुंचा हुआ हूं.........

आलस्य (AALASYA)

जून 04, 2020 10

मेरी पहली कविता (2007.08) आलस्य PHOTO:- HEADLINES EDUCATION बाल कविता - आलस्य आओ बच्चों आलस त्यागें, पढ़-लिखकर कुछ नाम कमाएं ...

हाल-ए-दिल (HAL-E-DIL)

जून 02, 2020 0

हाल-ए-दिल PHOTO SORCE:- VIMAL DABRAL अभी क्या हुआ था कुछ दिन पहले, एक शख्स दिल में उतरने लगा था। आदत न थी आसमां देखने की, चांद-ता...

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