गुरुवार, 21 मई 2020

ख़त भेजा था। (KHAT BHEJA THA)

ख़त भेजा था।
Photo source:- डाबर डबराल fb post

खत भेजा था उनको, जबाव मिल गया है।
इजहार कर आए थे, इकरार मिल गया है।।

कई बार उठी थी कलमें, पर कागज रह गए कोरे
दिल ने मारी हिल्लोरें, बा-मुश्किल रोकी लहरें
बेकरार मेरे दिल को, करार मिल गया है
इजहार कर आए............................
खत भेजा था...................................
कई बार की थी कोशिश, कई खत भी लिखे थे उनको
कहीं  रूठ ना जाएं वो, मैंने डर के न भेजे उनको
बेकरार मेरे दिल को, आराम मिल गया है।
इजहार कर आए............................
खत भेजा था...................................
मन डोला मेरा तब से, मैंने जब से देखा तुमको
मेरे दोस्त ये कहते थे, अरे प्यार हो गया तुमको
उनमें कहीं मुझको अपना, संसार मिल गया है।
इजहार कर आए............................
खत भेजा था...................................
तुमसे मिलने को अक्सर, फिरता था उन गलियों में
तेरा आना जाना अक्सर, होता था जिन गलियों से
तुझ बिन मेरा जीना, दुश्वार हो गया है
इजहार कर आए............................
खत भेजा था...................................

मैं गली से तेरी गुजरूं, और तू न दिखाई दे तो
मैं गीत सुहाने गांऊ, बड़े जोर से तुझे सुनांऊ
तेरे दीद बिन मेरा दिन, बेकार हो गया है।
इजहार कर आए............................
खत भेजा था...................................

-अनिल डबराल

लेबल:

शाम आ गई (SAAM AA GAYI)

शाम आ गई
ये शाम आ गई और शमा जल गई
दिल तसव्वुर में खोया तू याद आ गई
सर्द मौसम के थे सूखे पत्ते से हम
मर गए थे मगर चल रहा था भरम
तेरी याद आ गई और बहार आ गई 
मानों सूखे मेरे मन में घटा छा गई

ये शाम आ गई..........................
दिल तसव्वुर में खोया................
आती जाती हवाओं से पूछा किए
हाल तेरा सनम उनसे पूछा किए
तेरी खुशबू हवाएं लुटाती रही
हाल पर मेरे वो मुस्कराती रही

ये शाम आ गई..........................
दिल तसव्वुर में खोया................
रात चलती रही दीप जलता रहा
एक दीवाना शमा पर था मंडरा रहा
फिर शमा ना रही ना दीवाना रहा
प्यार में मिट गए बस कहानी रही
ये शाम आ गई..........................
दिल तसव्वुर में खोया................

मेरे ख्वाबों खयालों में बसना तेरा
जुल्फ लहरा के अपनी वो हंसना तेरा
तेरी जुल्फों उलझा के अपना ये दिल
धडकनें मेरे दिल की उलझती रही

ये शाम आ गई..........................
दिल तसव्वुर में खोया................

वो भी दिन थे सनम साथ जीएं थे हम
साथ रहने की कसमें भी खाए थे हम
दूर हमसे गए दूर दिल से गए
धड़कनें रो केे तुमको बुलाती रही

ये शाम आ गई..........................
दिल तसव्वुर में खोया................
ऐ खुदा गर थी वो आसमां की कली
तो कली को मिली फिर क्यूं दो गज जमीं
इस जमाने ने रूसवा किया था उसे
छोड़ के सब उसने जां तेरे नाम की

ये शाम आ गई..........................
दिल तसव्वुर में खोया.................
-अनिल डबराल

लेबल: