हाल-ए-दिल (HAL-E-DIL)

हाल-ए-दिल
PHOTO SORCE:- VIMAL DABRAL

अभी क्या हुआ था कुछ दिन पहले, एक शख्स दिल में उतरने लगा था।
आदत न थी आसमां देखने की, चांद-तारों को निहारने लगा था।।
बेखुदी का आलम न पूछो, प्रेम गीत गाने लगा था।
अभी क्या हुआ.............
एक शख्स दिल ............
दिल कभी किल्लोल करता, और कभी मायूस होता।
क्या बताऊं आपको मैं, दिल में कुछ-कुछ हो रहा था।
अभी क्या हुआ.............
एक शख्स दिल ............
खुश था दिल पर बात क्या थी, ये नही मैं जान पाया।
कल तक न था दिल का पता, और आज धक्-धक् सुन रहा था।।
अभी क्या हुआ.............
एक शख्स दिल ............
दिल था खुश उसकी झलक से, तो बात करने पर क्या होता।
अब फिजा के फूल गुल में, उसका चेहरा दिख रहा था।।
अभी क्या हुआ.............
एक शख्स दिल ............
बढ़ते कदम किसी डगर को, मैं डगर फिर भूल जाता।
मन आल्हादित कौतुहल-वश, नाचने को कर रहा था।
अभी क्या हुआ.............
एक शख्स दिल ............
प्रश्न करती लोगों की नजरें, मैं नजर ना चार करता।
उसके संग बदनाम होने में मजा अब आ रहा था।।
अभी क्या हुआ.............
एक शख्स दिल ............
ये तो था आगाज-ए-इश्क, अंजाम-ए-इश्क न जान पाया।
मेरे ख्वाबों के जहां में, एक आशियाना बन रहा था।
अभी क्या हुआ.............
एक शख्स दिल ............
मन-मोहिनी वह स्वर्ण-लता, शाखों में आगे बढ़ गई।
वह निचेष्ट बैठा धरा पर, बाट उसकी जोह रहा था।।
अभी क्या हुआ.............
एक शख्स दिल ............
                                                                                                                                       
-अनिल डबराल

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